सामान्य शिक्षा की तरह खेल शिक्षा का लक्ष्य है व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास । दूसरे शब्दों में व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास ही खेल शिक्षा का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ।  व्यक्ति के शारीरिक ,मानसिक सामाजिक और नैतिक मूल्यों के विकास द्वारा एक ऐसे अ्च्छे नागरिक बो बनाना जो देश के विकास में योगदान दे सकें ।शारीरिक शिक्षा एक व्यक्ति को शारीरिक स्वस्थता ,मानसिक जाग्रता वैहारिक संतुलन और सामाजिक दृष्टि से समायोजित और आध्यात्मिक उच्चता प्रदान करता है । लक्ष्य ; . लक्ष्य प्राप्ति केलिए आवश्यक सोपानों को उद्देश्य माना गया है । वह लक्ष्य प्राप्ति का निश्चित और संक्षिप्त भाग होता है । उद्देश्य प्राप्ति के क्षण में वह लक्ष्य हो जाता है । खेल के तीन मुख्य उद्देश्य निम्नांकित है - १. शारीरिक स्वस्थता ; एक प्रसन्न और सुखी जीवन बिताने केलिए शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ होना बहुत अनिवार्य है । २. सामाजिक प्रगुणता ; यह सामाजिक जीवन बिताने की क्षमता से संबन्धित है । शारीरिक शिक्षा कार्य सहकारिता , आपसी सम्मान ,आत्मविकास ,श्रद्धा, उत्साह जैसे गुणों के विकास का काफी अवसर प्रदान करते हैं । ये सभी गुण सुनागरिक बनाने में सहायक होते है . संस्कृति का लक्ष्य ; व्यक्ति को प्रादेशिक और वैश्विक वातावरण के साथ समायोजन और आस्वादन क्षमता बढाने के उद्देश्य से होता है ।